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चिरप्राचीन और चिरनवीन का संगम−समन्वय
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AJH1974Nov_6
#प्राचीन
#संगम
#समन्वय
चिरप्राचीन और चिरनवीन का संगम−समन्वय Document
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Topic Of Source Title
सद्ज्ञान की उपलब्धि मनुष्य का श्रेष्ठतम सौभाग्य
मनुष्य तुच्छ और घृणित है किन्तु दिव्यतम भी
शिक्षा की ही नहीं विद्या की भी आवश्यकता समझी जाय
व्यक्ति और समाज निर्माण की सत्र–शिक्षा पद्धति
आशातीत सफलता सम्पन्न प्रत्यावर्तन साधना कुछ समय के लिए स्थगित
चिरप्राचीन और चिरनवीन का संगम−समन्वय
जीवन विद्या संसार की सर्वोपरि उपलब्धि
सर्वतोमुखी सफल जीवन की साधना
दस−दस दिन के जीवन सत्रों का बीस फरवरी से शुभारम्भ
खोई गरिमा को प्राप्त करने के लिये वानप्रस्थ परम्परा का पुनर्जागरण
महिला जागरण युग की सबसे प्रमुख आवश्यकता
जन मानस को मोड़ने वाली संगीत शिक्षा
लोक शिक्षण एवं लेखन कला के संयुक्त शिक्षा सत्र
शिक्षार्थियों को आवश्यक ज्ञातव्य
जन मानस को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाली तीन क्रान्तिकारी योजनाएँ
युगान्तर चेतना के लिये भाव भरे अनुदान का आह्वान
गायत्री विद्या के अमूल्य ग्रन्थ−रत्न
स्वर्ग का अवतरण
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